Innocent love

Friday, April 23, 2021

कशमकश

कशमकश में है आम जनता घर में रहे या चुनावी रैलियों में जाए 
सोचने की बात है घर में भी कोरोना का खतरा बड़ा है..... मगर चुनावी रैलियों से अभी कोरोना दूर खड़ा है........
एक तरफ बार बार अपील हाथ धोने की......
ओर दूसरी तरफ नेताओ को चाहिए कुर्सी सोने की.......
एक तरफ कोरोनो भगाओ अभियान है .......
दूसरी तरफ लगा दाव और पार्टियों का सम्मान है.......
बात बहुत अजीब है ऑक्सीजन कम है अस्पतालों में.....बेहोश बैठे नेता महलों में........
एक तरफ नारों का जयघोष है... दूसरी तरफ चीख़ों का शोर है....
कुछ लड़ रहे जंग इस महामारी से......
कुछ लड़ रहे जंग अपने किस्से कहानी से.....
अब बस जीत का बिगुल बाकी है...... तू देख जमाना भी देखेगा जीत किसके हिस्से आती है...

Wednesday, April 14, 2021

शाम तो थी वो शायरीयो के नाम पर इश्क वालो के इश्क का इम्तिहान ही ले ले सोचकर पूछा किसी ने क्या है इश्क? किसी ने क्या खूब कहा इश्क वो दरिया है जितना डूबोगे उतना भीगोगे, जितना दूर जाओगे उतना पास आओगे,जितनी होंगी शिकायते उतनी ही होगी मोहब्बते.........फिर सवालों का सिलसिला यूं शुरू हुआ........जब पूछा किसी ने क्या है उसका प्यार, दिल ने कहा समुद्र सा है उसका प्यार जितना गहराई में जाओ उतना ही खूबसूरत.....जब पूछा किसी ने क्या अस्तित्व तुम्हारा, दिल ने कहा उसके प्यार के घोर अन्धकार में उजाले जैसा है मेरा अस्तित्व, चारो तरफ अंधेरा है फिर भी जुगनू सा है मेरा अस्तित्व.......जब पूछा किसी ने कहा तक है उसका साथ, दिल ने कहा जमीन से फलक तक का,दिन से रात तक का अंधेरे से उजाले तक का,जिंदगी से मौत तक का..........जब पूछा किसी ने क्या है वो तुम्हारे लिए उसका प्यार, दिल ने कहा प्यासे होंठों को बूंद सा है उसका प्यार; सूखे खेतो को बारिश सा है उसका प्यार; बेरंग जिंदगी में रंगो की फुहार सा है उसका प्यार ; बेवजह मुस्कुराहने सा है उसका प्यार; मौत से जिंदगी मिल जाने जैसा है उसका प्यारजब पूछा किसी ने क्या हो तुम उसके लिए दिल ने चुप रहना सही समझा, था तो बस वो एक सवाल ही ना क्या हूं मैं उसके लिए? सवाल बढ़ते रहे पर दिल ठहरा रहा एक ही सवाल क्या हूं मैं उसके लिए ,बस इतना ही सोचा मुझे तेरे इश्क वो पनाह दे दे; मेरी चाहतों को मंजिले दे दे; तेरी कदमों की बस धूल ही दे दे ;मेरी बेइंतहा मोहब्बत को कोई नजराना तो दे दे;कोई भूली बिसरी यादों की सौगात ही दे दे; मैं डूब रही हु तेरे दरिया में हाथ पकड़कर कोई किनारा तो दे दे ;तू जो भी दे कुबूल है मुझे बस मेरे एक सवाल का जवाब दे दे, क्या हूं मैं तेरे लिए???

Monday, April 5, 2021

वीर सपूत

हो गए विलीन वो अपनी मां के आंचल में फिर...
चले गए फिर हंसते हंसते फिर अपनी ही दुनिया में
रोती रह गई वो मां जिसकी आंख का तारा था .......
राह तकती रही वो दिलरुबा जिसकी मेंहदी में उसका नाम छुपा था........
 बेबस है वो सारे अपने  हसीं ठिठोली जिनके साथ वो किया करता था.....
मासूम-सा वो चेहरा जो देखता रहता था बार बार दरवाजे को आज वो भी कुछ सहमा-सा था....
इतने भी क्यों प्यारे है तुझे भारत मां तेरे वीर जो इतना जल्दी बुला लेती है
थोड़ी तो रुक जाती कुछ खुशियां ओर उसके हिस्से में आ जाती.....
वो भी तो तेरी हर धड़कन का हिसाब था,वो भी तेरी हर हसीं का गवाह था, वो भी तेरी खेत की हरियाली में लहराता था,.......😭 वो भी तो तेरा ही एक हिस्सा था, या तू उसमे बसा उसकी जिंदगी का पूरा किस्सा था......
चले गए वो वीर सभी बस बाते रह गई है कुछ कागज के टुकड़े क्या करेंगे दर्द कम उनके जाने का ....
भारत मां के वीर सपूतों के लिए आंख में आंसू कम पड़ जाते है  

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ढूंढू कहां

ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं  सच ...