Innocent love
Thursday, April 22, 2021
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ढूंढू कहां
ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
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ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
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मां तू जानती है क्या, तू कितनी अहम है मेरी जिन्दगी के लिए... जब याद आता है बचपन बस तू ही तो दिखती है...... घर के उस नमकीन खाने ...
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मेरी डायरी मेरे किस्से मेरी कहानी मेरे हिस्से खुशी के लम्हे गम के साए समेटे है हर जज्बात को खुद में कुछ शब्दों में बंधी श्याम और सुबह। ये स...
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