Innocent love

Wednesday, April 14, 2021

शाम तो थी वो शायरीयो के नाम पर इश्क वालो के इश्क का इम्तिहान ही ले ले सोचकर पूछा किसी ने क्या है इश्क? किसी ने क्या खूब कहा इश्क वो दरिया है जितना डूबोगे उतना भीगोगे, जितना दूर जाओगे उतना पास आओगे,जितनी होंगी शिकायते उतनी ही होगी मोहब्बते.........फिर सवालों का सिलसिला यूं शुरू हुआ........जब पूछा किसी ने क्या है उसका प्यार, दिल ने कहा समुद्र सा है उसका प्यार जितना गहराई में जाओ उतना ही खूबसूरत.....जब पूछा किसी ने क्या अस्तित्व तुम्हारा, दिल ने कहा उसके प्यार के घोर अन्धकार में उजाले जैसा है मेरा अस्तित्व, चारो तरफ अंधेरा है फिर भी जुगनू सा है मेरा अस्तित्व.......जब पूछा किसी ने कहा तक है उसका साथ, दिल ने कहा जमीन से फलक तक का,दिन से रात तक का अंधेरे से उजाले तक का,जिंदगी से मौत तक का..........जब पूछा किसी ने क्या है वो तुम्हारे लिए उसका प्यार, दिल ने कहा प्यासे होंठों को बूंद सा है उसका प्यार; सूखे खेतो को बारिश सा है उसका प्यार; बेरंग जिंदगी में रंगो की फुहार सा है उसका प्यार ; बेवजह मुस्कुराहने सा है उसका प्यार; मौत से जिंदगी मिल जाने जैसा है उसका प्यारजब पूछा किसी ने क्या हो तुम उसके लिए दिल ने चुप रहना सही समझा, था तो बस वो एक सवाल ही ना क्या हूं मैं उसके लिए? सवाल बढ़ते रहे पर दिल ठहरा रहा एक ही सवाल क्या हूं मैं उसके लिए ,बस इतना ही सोचा मुझे तेरे इश्क वो पनाह दे दे; मेरी चाहतों को मंजिले दे दे; तेरी कदमों की बस धूल ही दे दे ;मेरी बेइंतहा मोहब्बत को कोई नजराना तो दे दे;कोई भूली बिसरी यादों की सौगात ही दे दे; मैं डूब रही हु तेरे दरिया में हाथ पकड़कर कोई किनारा तो दे दे ;तू जो भी दे कुबूल है मुझे बस मेरे एक सवाल का जवाब दे दे, क्या हूं मैं तेरे लिए???

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