Innocent love
Wednesday, April 21, 2021
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Search This Blog
ढूंढू कहां
ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
-
ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
-
मां तू जानती है क्या, तू कितनी अहम है मेरी जिन्दगी के लिए... जब याद आता है बचपन बस तू ही तो दिखती है...... घर के उस नमकीन खाने ...
-
मेरी डायरी मेरे किस्से मेरी कहानी मेरे हिस्से खुशी के लम्हे गम के साए समेटे है हर जज्बात को खुद में कुछ शब्दों में बंधी श्याम और सुबह। ये स...
No comments:
Post a Comment