Innocent love

Saturday, January 9, 2021

दिल जानता है या रब जानता है

दिल जानता है या रब जानता है 
तुझे क्या बताऊं मैं अधूरी सी थी 
आने के बाद तेरे सब कुछ बदल गया
अंदाज बदले जज्बात बदले राहे बदली 
मंजिल वो ही होकर भी कुछ बदली सी है...... आंखो में भर कर आंसू तुझसे यूं हर जिद पूरी करवाना अब आदत सी हो गई है ....कुछ बिना कहे एहसाह इतने खूबसूरत भी होते है अब पता चला है..... राहें अब पहले से आसान लगने लगी है तेरा साथ पाकर इन रास्तों पर चलने का मन करने लगा है .....अब अधूरा चांद बस अधूरा लगता है पूरे चांद को देखने की आदत जो हो गई है...... अब ढलता सूरज भी शायद नए सवेरे का संदेश दे जाता है .....खुश तो मैं पहले भी थी अब एक नया सा समा आ गया ऐसा लगता है....तुझसे ये को इतना लगाव है इतनी ख्वाइसे है ये क्या है ....दिल जानता है या रब जानता है

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