Innocent love
Saturday, January 9, 2021
आग
जरूरी है ये आग जिन्दगी में कभी सोने को बनाने में मददगार कभी हीरे को सजाने में सलाहकार कभी पवित्र रिश्तों की कसौटी तो कभी इंसान को इंसान बनाती है...जलन है इसमें भी पर कोयले से हीरा भी यही बनाती है कभी इस पर चलकर अग्निपरीकषाएं देनी पड़ती है तो कभी यही मसाल बनकर रोशनी देती है.... क्या है इसका वजूद ये तो कोई नहीं जानता पर है ये हर किसी की दासता का हिस्सा, कभी आग बनकर तो कभी कोई जरूरी हिस्सा बनकर.......
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ढूंढू कहां
ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
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मां तू जानती है क्या, तू कितनी अहम है मेरी जिन्दगी के लिए... जब याद आता है बचपन बस तू ही तो दिखती है...... घर के उस नमकीन खाने ...
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