Innocent love
Saturday, January 2, 2021
आज फिर आपके आहोश मे
आ गए हम इस कदर उनके आहोष में ना चांद को देखूं ना तारो को बस देखकर उनको सुकून दिल ने यूं पा लिया जैसे जन्मों की प्यास पूरी हुई हो.... बैठकर देखते रहे उन्हें इस कदर होश ये भी ना रहा कब दिन का उजाला आया और कब रात ने दस्तक दी... चाहकर भी ना निकाल सके उन्हें हम अपने ख़यालो से जाने कैसी उनमें सादगी थी बस दिल में उतर गए..... रहे हम उनकी ताक में ऐसे की खुद को भूल गए जाने अनजाने जाने कब वो हमसे हमको चूरा ले गए.... हाथ पकड़कर वो हमे यूं राहों पर ले आए जैसे चलना सीखा रहे हो हम तो बस उनके साथ चलकर किस्मत आजमा रहे थे..... उनका यूं प्यार करना यूं बार बार वो छुअन का एहसास होना जाने कब हमने उन्हें यूं खुद को परेशान करने का हक दिया ....पर मुस्कुराती सी वो छुअन हमे नजाकत से भरे प्यार का एहसाह दिला गई और हम डूबते रहे उनके आहोस में और खुद को भूल गए......
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ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
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