रहते है उस दिल में जो हमारी जान है...
होकर भी रुखसत आपसे हम अनजान है
इनकार नहीं हमे इजहार -ए- मोहब्बत से पर खुद से ही इनकार है सोचते है इतना खूबसूरत मुकद्दर हमारा कहा जिसमें आपका साथ हो ......
डरते हैं भीतर से कहीं कोई अग्यार हमारे दर्मिया ना आ जाए
अख्ज कर कोई ले गया गर आपको सांसें हमारी थम जाएगी
अरमान है हमारा बैठकर घड़ी दो घड़ी आपसे गुफ्तगू करे मगर दिल ये इजाजत नहीं देता जाने डर है इसे किस बात का ।
बैठे है उस महफ़िल में जो हर सामयाने की सान है.......
रहते है उस दिल में को हमारी जान है.............
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