चाहिए तुझे क्या मुझसे बता दे जरा
क्यों तू दिखती है इतनी दूर मुझसे
राहे पड़ी है सुनसान तेरे इंतेज़ार में
देख तो ले एक बार आकर मेरे आहोश में .........
आएगी जब तू मेरी राहों में देख लेना खुशी से खुशी का ये नज़ारा देखने वाला होगा .........
तू चाहे या ना चाहे आना तुझे मेरी गलियों में है......
खुद को देख जब आयने में आखे आखो से मिली तो तेरा आना तय है
बस कुछ दिन की दूरी और है
जब चांद को देखूं तो राते और भी सुकून देती है...........
तेरा इन यादों में इन जज्बातों में इन लम्हों में इन ख़यालो में आना तय है
ए खुशी तुझे आना तो मेरी जिंदगी में ही है .....
तुझे अख्ज कर रख लूं इन पनाहो में .........
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