बेचैन सा है ये दिल एक झलक पाने को तेरी
हाल कुछ यू है की आंखे सब बोल रही है
सजने संवारने का सिलसिला चालू हो गया है
अब तो जल्दी आ जा,जल्दी आ जा
ढूंढू कहा खुद को खुद में ही बेचैन हूं ना आज का पता न कल का बस ख्वाइशों का शोर हैं खुद को पाने की चाह में बेबस भटकती दर बदर फिर रही हूं सच ...
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